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Rewa News: रीवा के मुकुंदपुर चिड़ियाघर में बाढ़ का कहर, नदी और नाले के बीच फंसी जिंदगी

Rewa News: रीवा के मुकुंदपुर चिड़ियाघर में बाढ़ का कहर, नदी और नाले के बीच फंसी जिंदगी

Rewa News: रीवा के मुकुंदपुर चिड़ियाघर में बाढ़ का कहर, नदी और नाले के बीच फंसी जिंदगी

Rewa News: रीवा शहर में अव्यवस्थित विकास के कारण जिस तरह इस बार लोगों को बाढ़ की मार झेलनी पड़ी, उसका असर मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी और चिड़ियाघर पर भी दिखाई दिया, नदी और नाले के बीच स्थित चिड़ियाघर में बाढ़ का पानी घुस गया और कई हिस्से पूरी तरह जलमग्न हो गए, हालात ऐसे बने कि वन्यजीवों के साथ उनकी देखरेख करने वाले कर्मचारी भी मुश्किल में फंस गए, राहत की बात रही कि किसी वन्यजीव की मौत नहीं हुई.

सिर्फ रीवा ही नहीं डूबा था, मुकुंदपुर चिडिय़ाघर में भी बाढ़ का भरा था पानी, शेर, भालू और 5 कर्मचारी दो दिन भूखे प्यासे फंसे थे, डायरेक्टर के घर में भरा पानी, फारेस्ट गार्ड हुए बर्बाद

मुर्तुजा नाला बना बड़ी चुनौती

चिड़ियाघर के बीच से गुजरने वाला मुर्तुजा नाला बारिश के दौरान लगातार उफान पर आ जाता है, नाले पर बनी पुलिया भी पानी बढ़ने के साथ डूब जाती है और इस बार हालात इतने गंभीर हो गए कि कर्मचारियों का वन्यजीवों तक पहुंचना पूरी तरह बंद हो गया, सफेद बाघ, तेंदुआ, भालू और अन्य वन्यजीवों के बाड़ों में तैनात कर्मचारी वहीं फंस गए, सबसे बड़ी चुनौती भोजन पहुंचाने की थी, कर्मचारियों और वन्यजीवों तक भोजन किसी तरह दीवार के दूसरी ओर से पहुंचाया गया.

बीहर नदी का पानी बाड़ों तक पहुंचा

एक तरफ मुर्तुजा नाले का पानी बढ़ रहा था, तो दूसरी तरफ बीहर नदी भी उफान पर थी, दोनों तरफ से पानी आने के कारण मुकुंदपुर चिड़ियाघर का बड़ा हिस्सा तालाब में तब्दील हो गया, वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए कर्मचारियों ने उन्हें बाड़ों से निकालकर नाइट हाउस में शिफ्ट किया, नाइट हाउस ऊंचाई पर होने के कारण वन्यजीव सुरक्षित रहे, लेकिन चिड़ियाघर की व्यवस्थाओं को भारी नुकसान पहुंचा और कई सामान बाढ़ के पानी में डूब गए.

कर्मचारियों के घर भी हुए जलमग्न

बाढ़ का असर सिर्फ चिड़ियाघर तक सीमित नहीं रहा, परिसर में बने कर्मचारियों और अधिकारियों के आवासों में भी पानी भर गया, संचालक रामेश्वर टेकाम के घर तक बीहर नदी का पानी पहुंच गया, मौजूद स्टाफ ने किसी तरह उनका सामान बचा लिया, लेकिन करीब आठ फॉरेस्ट गार्ड के घरों में पानी भरने से उनकी गृहस्थी का सामान बर्बाद हो गया, जिन कर्मचारियों ने दूसरों का सामान बचाया, उन्हें खुद भारी नुकसान झेलना पड़ा.

चिड़ियाघर की दीवार से टकराया ट्रक

बाढ़ के दौरान एक ट्रक भी पानी के तेज बहाव में अनियंत्रित हो गया, ट्रक का अगला हिस्सा पानी से निकल गया लेकिन पीछे का हिस्सा बहते हुए चिड़ियाघर की दीवार से जा टकराया और वहीं पलट गया, इस घटना से चिड़ियाघर की दीवार को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है, लगातार बढ़ते जलस्तर ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या चिड़ियाघर के लिए जगह का चयन पर्याप्त सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया गया था.

अब उठ रहे हैं जगह के चयन पर सवाल

मुकुंदपुर चिड़ियाघर एक तरफ बीहर नदी और दूसरी तरफ मुर्तुजा नाले से घिरा हुआ है, यही भौगोलिक स्थिति बारिश के समय इसे बाढ़ के खतरे के बीच ला देती है, जानकारों का मानना है कि प्राकृतिक वातावरण और घना जंगल वन्यजीवों के लिए अनुकूल जरूर है, लेकिन नदी और नाले के बीच ऐसी जगह पर बड़े प्रोजेक्ट का विस्तार करने से पहले बाढ़ के खतरे का गंभीरता से आकलन जरूरी है, अब दूसरे चरण के विस्तार की योजना पर भी इस घटना के बाद नए सिरे से विचार करने की जरूरत महसूस हो रही है.

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